हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह नासिर मकारिम शीराज़ी के प्रतिनिधि हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अलियान नेजाद ने वुज़ू और ग़ुस्ल के पानी में इसराफ़ का इन इबादतों के सही होने पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस संबंध में निम्नलिखित उत्तर प्रदान किया है।
प्रश्न: क्या वुज़ू और ग़ुस्ल के पानी में इसराफ़ करने से वुज़ू और ग़ुस्ल बातिल हो जाते हैं? (मरजा-ए-तक़लीद: हज़रत आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी)
उत्तर — हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अलियान नेजाद:
इसराफ़ गुनाहाने कबीरा में से एक है और शरीअत की चारो दलीलों — कुरआन, हदीस (मासूमीन (अ) की रिवायतें), अक़्ल तथा इज्माअ (फुक़हा की सर्वसम्मति) — के आधार पर हराम है।
कुरआन मजीद की अनेक आयतें लोगों को इसराफ़ से रोकती हैं और इसराफ़ करने वालों को शैतान का भाई बताया गया है।
लेकिन ग़ुस्ल और वुज़ू में पानी का इसराफ़ करना अपने आप में इन अमल को बातिल नहीं करता।
केवल एक विशेष स्थिति में वुज़ू बातिल होगा: यदि वुज़ू में बाएँ हाथ को धोते समय इतनी अधिक मात्रा में पानी इस्तेमाल किया जाए कि हाथों में मौजूद नमी वुज़ू के पानी की न रहकर बाहरी पानी (आबे-ख़ारिज) मानी जाए, और फिर उसी बाहरी पानी से मसह किया जाए, तो इस विशेष अवस्था में वुज़ू बातिल हो जाएगा।
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